"महाबोधि महाविहार को ब्राह्मणों के कब्जे से आजाद करना एक चुनौती है"

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"महाबोधि महाविहार को ब्राह्मणों के कब्जे से आजाद करना एक चुनौती है" महाबोधि महाविहार पर ब्राह्मणों का कब्जा है। महाबोधि महाविहार की कमेटी ब्राह्मणों के कब्जे में है या नियंत्रण में है। वैसे देखा जाए तो कानून के अनुसार, संविधान के अनुसार, इक्वलिटी बिफोर लॉ के अनुसार और फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के फंडामेंटल राइट के अनुसार महाबोधि महाविहार पर बौद्धों का व्यवस्थापन और नियंत्रण होना चाहिए था, मगर ब्राह्मणों ने प्लान बनाकर नेहरू के समय से उस तरह का बोधगया टेम्पल एक्ट, 1949 का कानून बनाकर रखा हुआ है।
अगर यह कानून बनाकर उन्होंने ऐसा किया हुआ है तो बोधगया टेम्पल एक्ट, 1949 का कानून बदलना होगा और कानून बदलने का काम पार्लियामेंट में अगर टू थर्ड मेजोरिटी आपके पास नहीं है, तो आप कानून नहीं बना सकते हैं। इसके लिए दूसरा कानून बनाना पड़ेगा। इस तरह पार्लियामेंट में टू थर्ड मेजोरिटी अगर हमारे पास नहीं है तो हम इस तरह का कोई कानून नहीं बना सकते बदलने की स्थिति आज के तारीख में हमारे पास नहीं है हैं। इसका मतलब यह है कि हमारे पास एक कानून तो महाबोधि महाविहार पर ब्राह्मण लोगों का कब्जा बना रहेगा। ऐसी स्थिति में बदलाव करने के लिए क्या करना होगा? अगर मान लो कि बोधगया टेम्पल एक्ट, 1949 में बदलाव करने के लिए बुद्धिस्ट लोगों का कोई आंदोलन चलाते हैं। महाबोधि महाविहार मुक्ति का मामला है और उसका कोई आंदोलन चलाते हैं, तो उनको लोगों का समर्थन लगेगा। अगर जन-आंदोलन होगा, तो यह बदलाव हो सकता है। अगर जन-आंदोलन होने से बदलाव हो सकता है, तो जन-आंदोलन करने के लिए बहुत बड़े पैमाने पर समर्थन की जरूरत होगी। आज के तारीख में भारत में बुद्धिस्ट लोगों की संख्या कितनी है? आज के तारीख में भारत में बुद्धिस्ट लोगों की संख्या 0.71 प्रतिशत है। यानी आज के तारीख में भारत में बुद्धिस्ट लोगों की संख्या पौना रूपया भी नहीं है। एक रूपया तो दूर की बात है। अगर आज की तारीख में भारत में बुद्धिस्ट लोगों की संख्या 0.71 प्रतिशत है। अगर यह संख्या 0.75 प्रतिशत होता तो पौना रूपया होता, ऐसा मानते। मगर भारत में बुद्धिस्ट लोगों की संख्या 0.71 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि बुद्धिस्ट लोगों का कोई मास आन्दोलन अर्थात जन-आंदोलन बनाना भी संभव नहीं है। यानी दोनों परिस्थिति में बोधगया टेम्पल एक्ट, 1949 में बदलाव लाना संभव नहीं है। अगर ऐसा है, तो इसका विकल्प क्या है? इसका विकल्प है कि एससी, एसटी, ओबीसी और माइनॉरिटी का बहुमत पचासी प्रतिशत है। इसलिए इन लोगों को जागना होगा, इन लोगों को तैयार करना होगा, उनकी संगठित शक्ति का निर्माण करना होगा और भारत की राजनीतिक सत्ता पर अर्थात संसद पर जो ब्राह्मणों का कब्जा है, उस संसद को ब्राह्मणों के कब्जे से मुक्त करना होगा। यह विकल्प है और इस विकल्प के दिशा में हमें आगे बढ़ना होगा। इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं है। यह रास्ता है और इस दिशा में हमको आगे बढ़ना होगा। मैं इस मौके पर इतना ही कहना चाहता है। इस दिशा में हम लोगों को आगे बढने के अलावा विकल्प नहीं है और हम लोग इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आपने इसी सन्देश के साथ अपनी बात समाप्त की।

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