बुद्ध भूमि पर अतिक्रमण का निषेध आंदोलन
मंदिर निर्माण के खिलाफ देश के 31 राज्यों में काली पट्टी बांधकर विरोध
बुद्ध भूमि पर मंदिर का निर्माण ब्राह्मणों का अतिक्रमण है : वामन मेश्राम साहब
बता दें
कि 29 अगस्त को
बहुजन क्रांति मोर्चा के राष्ट्रीय संयोजक वामन मेश्राम साहब ने घोषणा किया था कि 29 अगस्त से 5 अगस्त 2020 तक राम मंदिर निर्माण के विरोध में हम
काली पट्टी बांधकर निषेध आंदोलन करेंगे. इसके बाद 29 अगस्त से ही यह आंदोलन देश के 31 राज्यों में शुरू हो गया. वहीं राम
मंदिर निर्माण के दिन इस आंदोलन का असर देशभर में सुबह से दिखाई देने लगा. बड़े
पैमान पर मूलनिवासी बहुजन समाज के एससी, एसटी, ओबीसी एवं मायनॉरिटी के लोग और उनके
हजारों संगठनों ने हाथ या सिर में काली पट्टी बांधकर या अपने घरों पर काला झंडा
लगाकर विरोध किया गया.
बुद्ध
भूमि पर मंदिर का निर्माण ब्राह्मणों का अतिक्रमण है, इसलिए हम इसका विरोध करते हैं. जैसे
मुगलों को दूसरों की भूमि पर मस्जिद बनाने का अधिकार नहीं था, ऐसा ब्राह्मण कहते थे, तो ब्राह्मणों को भी बुद्ध भूमि पर राम
मंदिर बनाने का अधिकार नहीं है, ऐसा हम मानते हैं. अयोध्या (साकेत) राम जन्म भूमि नहीं है, वह बौद्ध भूमि है. वहाँ पर बौद्ध स्तूप, बौद्ध विहार और बड़ा संघाराम था. यही
नहीं साकेत बौद्ध धम्म का सबसे बड़ा केन्द्र था. इसे पुरातत्व विभाग के द्वारा
प्रमाणित किया गया था और सिद्ध किया गया था. मुगल काल में बुद्ध भूमि पर मस्जिद
बनाने के लिए ब्राह्मणों ने मुगलों की मदद की. जैसे मुगल आक्रमकारी और विदेशी थे, उसी तहर से ब्राह्मण भी विदेशी और
आक्रमणकारी हैं. यह बात इस घटना से सिद्ध होती है. वहाँ पर पुरातत्व को राम और राम
मंदिर से संबंधित एक भी सबूत नहीं मिला. राम की एक भी वस्तु नहीं मिली. इतना ही
नहीं, ब्राह्मणों
को बाबरी मस्जिद में राम की मूर्ति रखने के लिए राम की मूर्ति गोरखपुर से लानी पड़ी
और प्रशासन की मदद से उसे वहां पर रख दिया गया. यह इस बात का सबूत है कि तथाकथित
अयोध्या में राम का एक भी पुरातत्वीय अवशेष नहीं मिला है.
मुगल काल
में ब्राह्मणों ने मुगलों की मदद से बुद्ध भूमि पर मस्जिद बनाई गई. इस काम में
ब्राह्मणों ने मुगलों की मदद की और इसकी वजह से बौद्धों के साथ ब्राह्मणों का
शत्रुत्व बना. मुगल आक्रमकारी और विदेशी थे, ब्राह्मण भी विदेशी और आक्रमणकारी थे.
यह बात इस घटना से सिद्ध होती है. आज मुगल और मुसलमानों का ब्राह्मण विरोध करने का
भास निर्माण कर रहे हैं. उसका कारण है कि अनपढ़, अशिक्षित, अजागृत, एससी-एसटी, आबीसी का इस्तेमाल करने के लिए ऐसा कर
रहे हैं और यह इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य के लिए कर रहे हैं.
गूगल से ली गई छायाचित्र
सम्राट बृहद्रथ मौर्य की हत्या करने के बाद अयोध्या साकेत में वजूद में आया. उसके पहले उसका नाम साकेत ही था अयोध्या नहीं. रामायाण में राम की राजधानी का नाम अयोध्या है और इतिहास में पुष्यमित्र शुंग के राजधानी का नाम अयोध्या है. ऐसा इतिहास कहता है. इससे सिद्ध होता है कि राम काल्पनिक व्यक्ति थे अर्थात राम का वास्तविक नाम पुष्यमित्र शुंग है, जिसने सम्राट बृहद्रथ मौर्य की हत्या की थी. ब्राह्मण धर्म के अनुसार, ओबीसी ही शूद्र वर्ण के लोग हैं. शेड्यूल कास्ट के लोग अछूत लोग हैं जो वर्ण व्यव्स्था के बाहर के लोग हैं. रामायाण में राम ने शूद्र शंभूक अर्थात आज के ओबीसी के पूर्वज की हत्या की है, ऐसा बताया गया है तो राम ओबीसी के आराध्य दैवत कैसे हो सकते हैं? @Nayak1
Prohibition movement of encroachment on Buddha land
Black-banded protests in 31
states of the country against temple construction
Construction of temple on Buddha land is an
encroachment of Brahmins:Waman Meshram Saheb
The governments of any country work for the people
and the country, but the governments elected by the EVM scam in India have been
working only for the Brahmins. Due to this ravi of the government, where a
large section of India, ie, 85 percent of the indigenous Bahujan
society has got away from their own rights, all the rights of the minority
people have been illegally occupied. Governments are doing anti-Bahujan work
due to illegitimate occupation. This can be gauged from the fact that the
government is constructing a Ram temple in Ayodhya (Saket) on the one hand and
on the other side there is a movement across the country against the
construction of the temple.
Let me tell you that on 29 August, the National Convenor of Bahujan Kranti Morcha Vaman Meshram Saheb had announced that from 29 August to 5 August 2020, we will carry out a prohibition movement by tying a black band to protest the construction of Ram temple. After this, from 29 August this movement started in 31 states of the country. On the day of the construction of Ram temple, the effect of this movement started to be visible throughout the country from morning. On a large scale, people of SC, ST, OBC and minorities of the indigenous Bahujan Samaj and thousands of their organizations protested by putting black bands in their hands or heads or putting black flags on their houses.
The construction of the temple on Buddha land is an
encroachment of Brahmins, so we oppose it. Just as the Mughals did not have the
right to build mosques on the land of others, Brahmins used to say that, so
Brahmins also do not have the right to build a Ram temple on Buddha land, we believe
that. Ayodhya (Saket) is not a birthplace of Rama, it is a Buddhist land. There
were Buddhist stupas, Buddhist viharas and Bada Sangharam. Not only this, Saket
was the biggest center of Buddhist Dhamma. It was certified and proved by the
Department of Archeology. The Brahmins helped the Mughals to build a mosque on
Buddha land during the Mughal period. Just as the Mughals were aggressive and
foreign, Brahmins are also foreign and invasive. This point is proved by this
incident. There archeology could not find any evidence related to Ram and Ram
temple. Not a single item of Ram was found. Not only this, the Brahmins had to
bring the idol of Ram from Gorakhpur to keep the idol of Ram in Babri Masjid
and with the help of administration, it was kept there. This is proof that not
a single archaeological remains of Rama have been found in the so-called
Ayodhya.
In the Mughal period, the Brahmins built a mosque
on the Buddha land with the help of the Mughals. The Brahmins helped the
Mughals in this work and this led to the enmity of the Brahmins with the
Buddhists. The Mughals were aggressive and foreign, Brahmins were also
foreigners and invaders. This point is proved by this incident. Today, the
Brahmins are opposing Mughals and Muslims. The reason for this is that the
illiterate, uneducated, unaware, SC-ST, are doing this to use the ABC and are
using it for political purpose.
After killing Emperor Brihadratha Maurya, Ayodhya came into existence in Saket. Before that his name was Saket and not Ayodhya. In the Ramayana, the name of the capital of Rama is Ayodhya and in the history, the name of the capital of Pushyamitra Sunga is Ayodhya. This is what history says. This proves that Rama was a fictitious person, that is, Rama's real name is Pushyamitra Sung, who murdered Emperor Brihadratha Maurya. According to Brahmin religion, OBCs are the people of the Shudra varna. Schedule cast people are untouchable people outside the varna system. In the Ramayana, Rama has killed the ancestor of the Shudra Shambhuk i.e. today's OBC, it is said that how can Ram be an obedient devil of the OBC? @ Nayak1
Thank you Google