बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ का 34वाँ संयुक्त गुजरात राज्य अधिवेशन
हम हर स्थिति, परिस्थिति में अपने
आंदोलन को लगातार जारी रखना चाहते हैं : वामन मेश्राम
साहब
उन्होंने कहा एक और बात समझना बहुत ज्यादा जरूरी है. कहा कि जो एमपी चुनकर जाते हैं जो मंत्री होते हैं वह बोलते क्यों नहीं? इसलिए नहीं बोलते क्योंकि 24 सितंबर 1932 को गांधी के द्वारा पूना पैक्ट केवल शेड्यूल कास्ट पर जबरदस्ती से लागू था. मगर जब संविधान में पांचवी और छठी अनुसूची आदिवासियों के लिए लागू की गई तो नेहरू ने और ब्राह्मणों ने सोचा की पांचवी और छठी अनुसूची के अनुसार आदिवासी के इलाके में स्वायत्त शासन लागू होगा और आदिवासी अपने स्वायत्त शासन के अधीन उस इलाके का राजा हो जाएंगे. ऐसी परिस्थिति में आदिवासियों को आजादी मिल जायेगी. जमीन के नीचे जो धन संपदा है उस धन संपदा के आदिवासी मालिक हो जाएंगे. तो योजना बनाकर पांचवी, छठी अनुसूची को प्रभाव शून्य करने के लिए आदिवासियों के एमएलए और एमपी और मंत्री चुनकर जाने के लिए उन्होंने जॉइन टू इलेक्ट्रेड जो पूना पैक्ट में शेड्यूल कास्ट के लिए लागू किया गया था वही ज्वाइन इलोक्ट्रेट आदिवासियों को भी लागू कर दिया. उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा आदिवासियों ने जॉइंट इलोक्ट्रेट की मांग नहीं की मगर कांग्रेस के लोगों ने आदिवासियों के ऊपर जॉइंट इलोक्ट्रेट लागू कर दिया. कांग्रेस के द्वारा आदिवासियों के ऊपर थोपा गया और थोपने की वजह से यह परिणाम हुआ कि आदिवासियों से जो एमपी और मंत्री जुनकर जा रहे हैं विरोध नहीं कर पा रहे हैं.
आर्थिक मंदी
और मजदूरों की भूखमरी के मूल कारणों पर अपनी बात रखते हुए बामसेफ के राष्ट्रीय
अध्यक्ष ने कहा 24 मार्च को
भारत में सबसे पहले लॉकडाउन घोषित किया, लॉकडाउन घोषित करने के पीछे क्या मकसद
था? भारत
सरकार में अभी तक नहीं बताया. मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं कि जब कोरोना वायरस
भारत में आया और भारत में पहला मरीज जनवरी 2020 में मिला. इसके बाद भी भारत सरकार
जागृत नहीं हुई, बल्कि देश
का प्रधानमंत्री डोनॉल्ड ट्रंप का स्वागत करने के लिए लाखों लोगों का कार्यक्रम
अहमदाबाद में आयोजित किया. जबकि जनवरी में ही इसे रोकने के लिए तैयारी की जा सकती
थी. लॉकडाउन 24 मार्च को
क्यों घोषित किया गया? यह जानना
बहुत जरूरी है.
उन्होंने
कहा भारत में कानून बनाकर प्राइवेटाइजेशन लागू कर दिया गया. यह प्राइवेटाइजेशन
सारे देश भर में हेल्थ केयर एरिया में भी लागू कर दिया गया. हेल्थकेयर कार्यक्रम के
लिए बजट देने का कार्यक्रम बंद कर दिया गया. इससे देशभर में हेल्थ केयर का जो
नेटवर्क था बर्बाद हो गया. हेल्थ केयर का जो ढांचा था वह पूरी तरह से बर्बाद कर
दिया गया. ऐसी परिस्थिति में महामारी भारत में आई, सरकार सोचा महामारी की कोई दवा तो है
नहीं. महामारी से लोग बहुत बड़े पैमाने पर लाखों करोड़ों की संख्या में मर जाएंगे और
सारी जिम्मेदारी भारत सरकार के ऊपर आएगी तो आनन-फानन में नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को लॉकडाउन घोषित कर दिया.
क्योंकि बचाने के लिए हेल्थ केयर का कोई ढांचा नहीं है. लोगों को अगर बचाना है तो
बचाने के लिए हेल्थ केयर का ढांचा होना चाहिए, इंफ्रास्ट्रक्चर होना चाहिए. इसलिए
लॉकडाउन घोषित कर दिया कि सारे लोग अपने घर में रहे और जो सारा चैनल है वह नरेंद्र
मोदी का समर्थन करने लगा. लॉकडाउन लगाने की वजह से मीडिया ने नरेंद्र मोदी को
दुनिया का सबसे बड़ा नेता घोषित कर दिया.
वामन मेश्राम साहब ने आरोप लगाते हुए कहा संकट निर्माण करने में कांग्रेस पहले नंबर पर दूसरे नंबर पर बीजेपी जिम्मेदार है. लॉकडाउन में फैक्ट्रियां बंद कर दी, प्रोडक्शन बंद कर दिया और प्रोडक्शन बंद करने की वजह से अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई. दूसरी बात निजीकरण की वजह से भारत में कोरोना का टेस्ट करने वाली एक भी किट नहीं थी. दूसरी तरफ मीडिया के द्वारा कोरोना का भय पैदा कर दिया गया भय पैदा करने की वजह से उन मजदूरों का पलायन अपने घरों की तरफ जाना शुरू हो गया. उन्होंने सोचा फैक्ट्रियों में काम नहीं है, कंपनी मालिक मजदूरों को सैलरी देने के लिए तैयार नहीं है. उन्होंने सोचा जब सैलरी नहीं है तो अपने परिवार का पालन पोषण कैसे करें. यहां ऐसे मरने के बजाय अपने घर में मरे. जब वे अपने घर की तरफ पलायन करने लगे तो सरकार ने ट्रेनें बंद कर दी, सरकारी बसें बंद कर दिया, प्राइवेट बसें बंद कर दिया. सरकार ने हर प्रकार के साधन बंद कर दिए. परिणामतः मजदूरों के पास अपने गांव के तरफ जाने का कोई साधन नहीं था तो मजदूरों को कई-कई हजार किलोमीटर पैदल चलना पड़ा.
इतना
भयंकर पलायन भारत के इतिहास में संभवत दुनिया के इतिहास में नहीं हुआ था. क्योंकि
अमेरिका और यूरोप के लोगों ने लॉकडाउन घोषित नहीं किया. उन्होंने अपनी
अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से बंद करने का काम नहीं किया. इस तरह से यह षड्यंत्र हम
लोगों को समझना बहुत जरूरी है. निजीकरण से हेल्थ केयर का प्राइवेटाइजेशन करने की
वजह से पूरा हेल्थ केयर का ढांचा बर्बाद कर दिया. इस वजह से लॉकडाउन घोषित किया.
लॉक डाउन से अर्थव्यवस्था चौपट हो गई, अर्थव्यवस्था चौपट होने से उद्योग चौपट
हो गए और मजदूरों को रोजगार मिलना बंद हो गया. लगभग साढे 45 करोड़ लोगों का रोजगार केवल लॉकडाउन के
समय बर्बाद हो गया. उनके सामने एक और भयंकर और बड़ी समस्या खड़ा कर दी गई कि उनको
भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया गया और संगठित मजदूर थे उन लोगों को रोजगार बंद
करने की वजह से भी भुखमरी का संकट उनके सामने खड़ा हो गया. इस तरह से अर्थव्यवस्था
पूरी तरह से चौपट हो गई.
अंत में
वानम मेश्राम साहब ने कहा कि इसी दौरान लेवर लॉ को भी खत्म करने का अभियान चलाया
गया, उस
कानूनों को खत्म करने का भी षड्यंत्र किया गया. आरएसएस मोहन के भागवत ने कहा कि
लॉकडाउन एक अवसर है. हाँ लॉकडाउन उनके लिए एक अवसर है वह अवसर मजदूरों के अधिकारों
को खत्म करने का अवसर है, लॉकडाउन
मजदूरों को सड़कों पर मारने का अवसर है, लॉकडाउन में सारे लोगों को सारे काम
बंद करने के लिए रोका गया, मगर राम
मंदिर बनाने के लिए अवसर है. राम मंदिर जिस जमीन पर बनाया जा रहा है वह बुद्ध भूमि
है, राम जन्म
भूमि नहीं है. उनके लिए भी अवसर है और जो वहां बुद्ध स्तूप है उसको जेसीबी चलाकर
खत्म करने के लिए अवसर है. यह सारा का सारा करने के लिए अवसर है.@Nayak1
34th Joint Gujarat
State Session of BAMCEF and Rashtriya Moolnivasi Sangh
We want to continue our movement continuously in every situation, situation: Waman Meshram Saheb
We do not want to stop our work even in the event of lockdown. We want to continue our movement continuously in every situation, every situation, every situation. Therefore, in this adverse situation, 34th session of virtual Gujarat state is taking place with the help of digital technology. This was stated by Bamsef national president Vaman Meshram while addressing the first session of the 34th state session of Gujarat on 8 August 2020. This virtual state session was inaugurated by Dr. Navghan Odadera (Principal SM Jadeja, Arts and Commerce College Kutiana, Porbandar). Dr. Prafulla Vasava (National President, Tribal Tiger Army), E.G. KL Pasi, Raman Bhai Parmar (BAMCEF District President, Ahmedabad) and Arun Jogadia (Bhartiya Yuva Morcha, National Convenor) also addressed.
National President Waman Meshram Saheb said, it is said that the country got independence on 15 August 1947. When the British left in the so-called independence, they left Jawaharlal Nehru as Prime Minister. Just as the British were foreigners, according to DNA, Brahmins are also foreigners. That is, foreign Brahmins became the rulers of the country. The Brahmins captured the country and after occupying it planned to strengthen this occupation so that the Brahmins could win the election in every election. Worked in this way by planning. No corruption has happened anywhere in the world and it does not happen as much as corruption has happened in India's elections.Further said, 26 January 1950 the Constitution came into force and elections were held in 1952 in independent India. In the election, Pandit Jawaharlal Nehru gave 3.5 percent of the ticket to Brahmins and won 59 percent of the Brahmins. And 22.5 percent of the SC, ST people who came from the joint electorate had no choice but to support them. Because those who were brought by giving tickets did not have the right to decide. Rather, Brahmins had the right to take decisions. Therefore, it was decided for him that the SC who is the elective representative, this SC is not our ST. In this way the rule of Congress Brahmins was established in India.
Waman Meshram Saheb
said, 15 years ago, the area where the tribals used to reside, the wealth of
11000 lakh crores is under the ground. A report was prepared by satellite, the
report was with the Government of India. This figure is from 11-20 years ago.
There is no idea of how
many thousand lakh crores would have cost him today. In that area, the Congress
implemented the program of development and in the area where water, forest,
land was occupied by tribals, these people displaced the tribals by creating a
dam. Because this could not happen without displacing the tribals, the tribals
in independent India started opposing it, then the Congress governments
declared the tribals as Naxalites and started a campaign to kill them.
He said it is very
important to understand one more thing. Said that those who go by electing MPs
who are ministers do not speak? Not to speak because on 24 September 1932, the
Poona Pact by Gandhi was forcefully applied to the schedule cast. But when the
Fifth and Sixth Schedule in the Constitution was implemented for the tribals,
Nehru and the Brahmins thought that according to the Fifth and Sixth Schedule,
autonomous rule would be implemented in the tribal areas and the tribals would
become the kings of that area under their autonomous rule. In such a situation,
tribals will get freedom. Adivasi owners of that wealth will be the property
which is under the land. So to make the plan, the MLA and MP and minister of
the tribals to reduce the impact of the Fifth, Sixth Schedule, they also joined
the Join Electorate, which was applied for the schedule cast in the Poona Pact.
He expressed surprise that the tribals did not demand a joint electorate, but
the Congress people imposed a joint electorate on the tribals. Due to the
imposition and imposition of the tribals by the Congress, it was a result that
the MPs and ministers who are going passionately against the tribals are not
able to resist.
Waman Meshram Sahab
further said that EVMs are more dangerous than joint electorates. Brahmins have
different parties all over the country. The Congress goes against the BJP and
the BJP in opposition to the Congress. Communist Party comes against both. In
this way all the parties of Brahmins have agreement for power among themselves.
They fight among themselves for power, but to enslave us. Their policy is the
same, we all need to understand this politically a lot.
Speaking on the root
causes of the economic slowdown and starvation of the workers, the national
president of BAMCEF said that on March 24, the first lockdown was declared in
India, what was the motive behind declaring the lockdown? Not yet told in Government
of India. I want to tell you that when the corona virus arrived in India and
the first patient in India was found in January 2020. Even after this, the
Government of India did not wake up, but organized a program of lakhs of people
in Ahmedabad to welcome the country's Prime Minister, Donald Trump. Whereas in
January, preparations could be made to stop it. Why was the lockdown announced
on March 24? It is very important to know this.
He said that
privatization was enacted by making laws in India. This privatization has also
been implemented in health care areas all over the country. The budget granting
program for the healthcare program was discontinued. This ruined the network of
health care across the country. The structure of health care was completely
ruined. In such a situation an epidemic occurred in India, the government
thought that there is no medicine for the epidemic. People will die in a large
number of millions due to the epidemic and if the entire responsibility falls
on the Indian government, then in a hurry, Narendra Modi declared a lockdown on
24 March. Because there is no structure of health care to save. If people want
to be saved, then there should be a structure of health care, there should be
infrastructure to save. Therefore, the lockdown was declared that all the
people stayed in their house and the entire channel which was there started
supporting Narendra Modi. Because of the lockdown, the media declared Narendra
Modi as the world's biggest leader.
Waman Meshram Saheb
alleged that the Congress is responsible for creating the crisis, BJP at number
two. Lockdown shut down factories, stopped production and the economy was
completely destroyed due to ceasing production. Secondly, due to
personalization, there was not a single kit to test the corona in India. On the
other hand, the fear of Corona was created by the media because of the fear
that the exodus of those laborers started going towards their homes. He thought
that there is no work in factories, the company owner is not ready to give
salary to the workers. He thought how to take care of his family when there is
no salary. Instead of dying here, I died in my house. When they started
migrating towards their home, the government stopped the trains, stopped the
government buses, stopped the private buses. The government stopped all means.
As a result, the laborers had to walk many thousands of kilometers on their way
to their village.
Such a terrible exodus
probably did not occur in the history of India. Because the people of America and
Europe did not declare a lockdown. He did not work to completely shut down his
economy. In this way, it is very important for us to understand this
conspiracy. Privatization of health care through privatization ruined the
entire health care structure. Because of this, the lockdown was declared. The
economy collapsed due to the lock-down, industries collapsed due to the
collapse of the economy and the workers got employment. Employment of about
45.5 million people was wasted at the time of lockdown. Another serious and big
problem was raised in front of them that they were driven to the brink of
starvation and the hunger crisis also stood in front of them because of the
employment of those people who were organized. In this way the economy
completely collapsed.
In the end, Wanam Meshram Saheb said that during this time there was a campaign to abolish the labor law, there was a conspiracy to abolish those laws. Bhagwat of RSS Mohan said that the lockdown is an opportunity. Yes. Lockdown is an opportunity for them. It is an opportunity to abolish the rights of workers, lockdown is an opportunity to kill the workers on the streets, in lockdown all the people are stopped to stop all the work, but the opportunity to build Ram temple is. The land on which the Ram temple is being built is the Buddha land, Ram is not the land of birth. There is also an opportunity for them and the Buddha Stupa there is an opportunity to eliminate them by running JCB. All this Of All Have the opportunity to do. @ Nayak1
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