चार #दिन गायब #होकर देख लीजिए,
लोग आपका #नाम भूल #जाएंगे।
#इंसान सारी #जिंदगी...
इस #धोखे में #रहता है कि...
वह #लोगों के लिए #अहम है।
लेकिन #हकीकत यह #होती है कि..
#आपके #होने #ना होने से
किसी को कोई #फर्क नही पड़ता।।
जिसकी जितनी #जरूरत होती है..
उसकी उतनी ही #अहमियत होती है।।
न रुकी वक़्त की गर्दिश, न ज़माना बदला,
पेड़ सूखा तो परिंदो ने ठिकाना बदला!! निशा
जय मूलनिवासी