पेरियार ई.वी. रामासामी : ब्राह्मणवादी व्यवस्था के विरुद्ध सामाजिक क्रांति का नाम
नई दिल्ली | Nayak1News
आज 24 दिसंबर को ई.वी. पेरियार रामासामी के 52वें परिनिर्वाण दिवस पर देश-दुनिया के सामाजिक न्याय समर्थक उन्हें कोटि-कोटि नमन कर रहे हैं।
जन्म: 17 सितंबर 1879
परिनिर्वाण: 24 दिसंबर 1973
कौन थे पेरियार?
ईरोड वेंकट नायकर रामासामी, जिन्हें दुनिया पेरियार के नाम से जानती है, केवल एक नेता नहीं बल्कि सोच की क्रांति थे। उन्होंने जीवन भर ब्राह्मणवाद, जातिवाद, अंधविश्वास और सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष किया।
आत्मसम्मान आंदोलन : गुलामी के खिलाफ वैचारिक विद्रोह
1925 में पेरियार ने आत्मसम्मान आंदोलन की शुरुआत की। इस आंदोलन का उद्देश्य था —
- मनुष्य को मनुष्य की तरह जीने का अधिकार
- जाति आधारित भेदभाव का अंत
- महिलाओं की समानता
- धर्म के नाम पर शोषण का विरोध
राजनीतिक सफर और द्रविड़ आंदोलन
पेरियार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से शुरुआत की, लेकिन जब उन्हें लगा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय के प्रश्न पर ईमानदार नहीं है, तो उन्होंने उसका परित्याग कर दिया।
उन्होंने जस्टिस पार्टी को मजबूत किया, जो आगे चलकर द्रविड़ कड़गम बनी।
महिलाओं और वंचित समाज के प्रबल समर्थक
पेरियार ने महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने की खुली वकालत की। उन्होंने बाल विवाह, देवदासी प्रथा और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ संघर्ष किया।
वे उन गिने-चुने विचारकों में थे जिन्होंने कहा — “स्त्री की मुक्ति के बिना समाज की मुक्ति संभव नहीं।”
आज भी प्रासंगिक क्यों हैं पेरियार?
आज जब संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक समानता पर हमले हो रहे हैं, पेरियार का विचार पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है।
- जातिवाद के खिलाफ वैचारिक हथियार
- वैज्ञानिक सोच का आधार
- संविधानिक मूल्यों की रक्षा
श्रद्धांजलि नहीं, संकल्प का दिन
पेरियार का परिनिर्वाण दिवस केवल श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि उनके अधूरे संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का दिन है।

