भीमा कोरेगांव विजय दिवस:सामाजिक गुलामी के खिलाफ ऐतिहासिक विद्रोह

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01 जनवरी: सिर्फ नया साल नहीं, मूलनिवासी बहुजन समाज की आज़ादी, विजय और शिक्षा का ऐतिहासिक दिन
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01 जनवरी: सिर्फ नया साल नहीं, बल्कि मूलनिवासी बहुजन समाज की आज़ादी, विजय और शिक्षा का ऐतिहासिक दिन

✍️ विशेष रिपोर्ट | NAYAK1NEWS

दुनिया के लिए 01 जनवरी नया साल हो सकता है, लेकिन मूलनिवासी बहुजन समाज के लिए यह दिन नई ज़िंदगी, नई चेतना और आज़ादी का प्रतीक है।

हमारे लिए 01 जनवरी:
✔ गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का दिन
✔ शौर्य, पराक्रम और स्वाभिमान का दिन
✔ शिक्षा, समानता और महिला मुक्ति का दिन

01 जनवरी 1818: भीमा कोरेगांव — विजय का इतिहास

01 जनवरी 1818 को भीमा कोरेगांव में सिर्फ 500 महार सैनिकों ने 28,000 से अधिक पेशवाई सेना को पराजित किया।

यह युद्ध केवल सैन्य संघर्ष नहीं था, यह सामाजिक गुलामी के खिलाफ ऐतिहासिक विद्रोह था। मूलनिवासी बहुजन समाज ने यह सिद्ध कर दिया कि शौर्य जन्म से नहीं, संघर्ष से पैदा होता है

01 जनवरी 1848: शिक्षा की क्रांति

01 जनवरी 1848 को महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने अछूत, आदिवासी, पिछड़े और भारत की बेटियों के लिए पहली पाठशाला शुरू की।

यह कदम उस दौर में उठाया गया, जब शिक्षा पर कुछ वर्गों का एकाधिकार था और महिलाओं को पढ़ना पाप माना जाता था।

आज भारत की बेटियां जो सपने देख पा रही हैं,
उनकी जड़ें फुले दंपति की उसी क्रांति में हैं।

01 जनवरी: नया साल नहीं, नया संकल्प

इसलिए 01 जनवरी को सिर्फ नए साल की बधाई देना पर्याप्त नहीं है

यह दिन है —

  • हैप्पी विजय दिवस
  • हैप्पी शिक्षा दिवस
  • हैप्पी महिला मुक्ति दिवस

यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारी आज़ादी, शिक्षा और आत्मसम्मान किसी दान का परिणाम नहीं, बल्कि संघर्ष और बलिदान की देन है।

जय भीम ✊ | जय मूलनिवासी
यह लेख सामाजिक-शैक्षणिक जागरूकता हेतु प्रकाशित।

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