भारत में जन्मी, बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन
तीन देशों की नागरिकता, सत्ता संघर्ष और महिला नेतृत्व की ऐतिहासिक मिसाल
न्यू दिल्ली | NAYAK1NEWS
बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री और दक्षिण एशिया की राजनीति में एक सशक्त पहचान रहीं खालिदा जिया का 79 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ एक ऐसा ऐतिहासिक अध्याय समाप्त हो गया, जो भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश—तीनों देशों से जुड़ा रहा।
भारत में जन्म, विभाजन ने बदली पहचान
खालिदा जिया का जन्म वर्ष 1945 में भारत के जलपाईगुड़ी में हुआ था। उस समय जलपाईगुड़ी, दिनाजपुर जिले का हिस्सा हुआ करता था। यह वह दौर था जब भारत और पाकिस्तान का विभाजन नहीं हुआ था और बंगाल अविभाजित भारत का ही हिस्सा था।
1947 के विभाजन के बाद उनका परिवार दिनाजपुर चला गया, जो विभाजन के कारण सीमा के उस पार चला गया। इस प्रकार खालिदा जिया पहले भारत, फिर पाकिस्तान और अंततः बांग्लादेश की नागरिक बनीं।
1971 और बांग्लादेश का निर्माण
16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में भारत की जीत के बाद बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया। भारत सरकार और पाकिस्तान के बीच हुए समझौतों के बाद बांग्लादेश का गठन हुआ।
राष्ट्रपति की पत्नी से सत्ता संघर्ष तक
खालिदा जिया का विवाह जिया-उर-रहमान से हुआ, जो आगे चलकर बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने। वर्ष 1981 में एक तख्तापलट के दौरान उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद बांग्लादेश में लगभग 9 वर्षों तक सैन्य शासन रहा।
पति की मृत्यु के बाद खालिदा जिया पूरी तरह सक्रिय राजनीति में उतरीं। उन्होंने जनरल हुसैन मुहम्मद इरशाद के सैन्य शासन के खिलाफ 7 दलों का गठबंधन खड़ा किया।
गिरफ्तारी, संघर्ष और अडिग साहस
सैन्य शासन के खिलाफ आवाज़ उठाने की कीमत उन्हें चुकानी पड़ी। 1983 से 1990 के बीच उन्हें 7 बार हिरासत में लिया गया। एक महिला को कमजोर समझने वाली सत्ता के सामने वे अपने रुख पर अडिग रहीं।
उन्होंने 1986 के चुनावों का बहिष्कार कर लोकतंत्र की लड़ाई को और मजबूती दी।
1991: बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री
वर्ष 1991 में खालिदा जिया ने बांग्लादेश की सत्ता संभाली और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उन्होंने संसदीय व्यवस्था लागू की और निष्पक्ष चुनावों के लिए अंतरिम सरकार प्रणाली की शुरुआत की।
भारत से जुड़ाव और विरोधाभास
भारत में जन्म और गहरे संबंधों के बावजूद खालिदा जिया को एक भारत-विरोधी बांग्लादेशी नेता के रूप में भी देखा गया। यह उनके राजनीतिक जीवन का बड़ा विरोधाभास रहा।
फिर भी वे दो देशों के लिए गौरव और दक्षिण एशिया में महिला नेतृत्व की एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरीं।
देश कोई भी हो, एक महिला का संघर्ष हर महिला के लिए प्रेरणा होता है।
एक महिला को, एक महिला की ओर से भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏
निशा वामन मेश्राम
(राष्ट्रीय उपाध्यक्ष - बहुजन मुक्ति पार्टी,न्यू दिल्ली)
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