गाडगे बाबा और बाबासाहेब : आदर्श और शिष्य की अमर जोड़ी

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गाडगे बाबा और बाबासाहेब : आदर्श और शिष्य की अमर जोड़ी

🕯️ गाडगे बाबा और बाबासाहेब: आदर्श और शिष्य की अमर जोड़ी

ब्रेकिंग न्यूज़ | सामाजिक चेतना

किसी ने एक बार संत गाडगे बाबा से पूछा था — जब आपका इकलौता पुत्र मरेगा, तब क्या आप रोएंगे?

गाडगे बाबा ने अत्यंत शांत भाव से उत्तर दिया — “कितने करोड़ लोग मरते हैं, एक के लिए क्यों रोऊं?”

📅 6 दिसंबर 1956 : इतिहास का सबसे दुःखद दिन

लेकिन यही गाडगे बाबा, 6 दिसंबर 1956 को जब भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का महापरिनिर्वाण हुआ —

तो वे लगातार 14 दिनों तक रोते रहे। उनकी आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

🕯️ 20 दिसंबर 1956 : गुरु शिष्य का मिलन

15वें दिन अर्थात 20 दिसंबर 1956 को स्वयं संत गाडगे बाबा का भी महापरिनिर्वाण हो गया।

यह केवल संयोग नहीं था, यह विचारों की विरासत और संघर्ष की साझी साधना थी।

🔥 सामाजिक क्रांति की जोड़ी

  • गाडगे बाबा — कर्म, सेवा और समता के प्रतीक
  • बाबासाहेब — संविधान, न्याय और समानता के शिल्पकार

यह संबंध रक्त का नहीं, बल्कि विचारों का था।

👉 यह जोड़ी हमें सिखाती है कि सच्चा शिष्य वही होता है, जो गुरु के विचारों को जीता है।

🙏 कोटि-कोटि नमन

इन दोनों महापुरुषों को हमारा शत-शत नमन।

बा ने कहा है!

"कमर दर्द से उठना-बैठना मुश्किल है,तो गुनगुने तिल के तेल से 10 मिनट मालिश करो। जकड़न खुल जाएगी और दर्द कम होगा जाएंगा"

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