EVM पर उठते सवाल: क्या भारत का लोकतंत्र सुरक्षित हाथों में है?

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EVM पर सवाल: क्या भारत का लोकतंत्र सुरक्षित है? | Nayak1News
🚨 BREAKING NEWS | लोकतंत्र या मशीन? EVM पर देशव्यापी बहस तेज

EVM पर उठते सवाल: क्या भारत का लोकतंत्र सुरक्षित हाथों में है?

नई दिल्ली / Nayak1News

भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोकतंत्र की असली ताकत जनता के वोट में होती है। लेकिन जब उसी वोट की सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होने लगें, तो लोकतंत्र की नींव हिलने लगती है।

आज देशभर में सबसे बड़ा सवाल यही है – क्या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) वास्तव में जनता की इच्छा को सही तरीके से प्रतिबिंबित कर रही है?

🌍 दुनिया बनाम भारत: EVM पर अंतरराष्ट्रीय सवाल

यूरोप सहित कई देशों ने चुनाव प्रक्रिया में मशीनों की भूमिका पर पुनर्विचार किया है और पारंपरिक बैलेट या पूर्ण सत्यापन योग्य प्रणालियों को प्राथमिकता दी है। ऐसे में भारत में EVM को लेकर उठ रही शंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

⚖️ लोकतंत्र, अधिकार और पारदर्शिता

लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह भरोसे, सम्मान और नागरिक अधिकारों पर टिका होता है। यदि मतदाता को यह विश्वास न रहे कि उसका वोट सुरक्षित है, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होती है।

“जब तक EVM है, तब तक लोकतंत्र पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।” – वामन मेश्राम

🧾 VVPAT: समाधान या सिर्फ औपचारिकता?

वामन मेश्राम द्वारा VVPAT को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसका उद्देश्य था कि हर मतदाता अपने वोट का सत्यापन कर सके। हालांकि, आज भी सीमित बूथों पर ही पर्चियों की गिनती होती है, जिससे पूर्ण पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

📢 यह मुद्दा केवल राजनीति का नहीं

EVM को लेकर चिंता अब केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। देशभर के सामाजिक संगठन, बुद्धिजीवी और जागरूक नागरिक चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग कर रहे हैं।

जनता पूछ रही है:
जब वोट जनता देती है, तो गिनती जनता की आंखों के सामने क्यों नहीं?

✊ जनआंदोलन की जरूरत क्यों?

यह लड़ाई किसी एक पार्टी या सत्ता परिवर्तन की नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है। आज जरूरत है शांतिपूर्ण, संवैधानिक और जागरूक जनआंदोलन की, जो चुनावी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करे।

🗳️ EVM या लोकतंत्र – फैसला जनता को करना है

अगर भारत को एक मजबूत लोकतंत्र बनाना है, तो मतदाता के विश्वास को सर्वोच्च स्थान देना होगा। आज सवाल मशीन का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा का है।

जागो जनता – बचाओ लोकतंत्र पारदर्शिता ही असली शक्ति है

बा कहती हैं!

"स्मोकिंग या धूल से फेफड़े कमजोर हो गए हैं? एक चमच गिलोय रस +एक चमच तुलसी रस + एक चमच शहद सुबह खाली पेट पिए,फेफड़ों की सफाई और सांस की ताकत दोनों बढ़ेंगी"

#EVM | #VVPAT | #SaveDemocracy | #Nayak1News

नोट: यह लेख लोकतांत्रिक विमर्श और सार्वजनिक चिंता के संदर्भ में लिखा गया है।

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