सत्ता संघर्ष शुरू हुआ: RSS बनाम BAMCEF | संविधान बनाम सत्ता

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सत्ता संघर्ष शुरू हुआ: RSS बनाम BAMCEF | संविधान बनाम सत्ता
🚨 BREAKING NEWS | सत्ता संघर्ष शुरू हुआ – RSS बनाम BAMCEF

सत्ता संघर्ष शुरू हुआ: RSS और BAMCEF के बीच टकराव तेज

नई दिल्ली | 27 दिसंबर 2025 | NAYAK1NEWS

ओडिशा के कटक में प्रस्तावित BAMCEF और भारत मुक्ति मोर्चा (BMM) के 42वें राष्ट्रीय सम्मेलन की अनुमति अचानक रद्द किए जाने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और अखिल भारतीय पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक समुदाय कर्मचारी महासंघ एवम् द ऑल इंडिया बैकवर्ड एन्ड माइनॉरिटी कमिनिटी एम्प्लाइज फेडरेशन (BAMCEF के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है।

BAMCEF के सूत्रों का आरोप है कि यह निर्णय BJP–RSS सत्ता गठजोड़ के दबाव में लिया गया, जो सीधे तौर पर भारतीय संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों पर हमला है।

📌 प्रशासनिक फैसला और न्यायालय का रुख

26 से 30 दिसंबर 2025 तक कटक में प्रस्तावित सम्मेलन को लेकर जिला प्रशासन ने 21 दिसंबर को संभावित सांप्रदायिक तनाव का हवाला देते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया।

इसके बाद 24 दिसंबर को ओडिशा उच्च न्यायालय ने आयोजकों को अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए प्रशासन की आशंकाओं को सही ठहराया।

🗣️ वामन मेश्राम का तीखा बयान

"BAMCEF के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने इसे RSS-BJP सरकार द्वारा SC, ST, OBC और धर्मांतरित अल्पसंख्यकों की आवाज दबाने की सुनियोजित साजिश बताया है।"

मेश्राम के अनुसार यह कदम केवल एक सम्मेलन को रोकने का नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास है।

🔥 देशव्यापी आंदोलन की तैयारी

अंदरूनी सूत्रों के अनुसार BAMCEF, भारत मुक्ति मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा, बहुजन मुक्ति पार्टी ,बहुजन समाज पार्टी (BSP) और भीम आर्मी जैसे संगठनों के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहा है।

यह आंदोलन चार चरणों में होगा, जिसमें 36 में से 32 राज्य और 725 जिले शामिल किए जाने की संभावना है।

🚩 22 फरवरी 2026: नागपुर में बड़ा ऐलान?

अपुष्ट लेकिन मजबूत सूत्रों के मुताबिक, 22 फरवरी 2026 को वामन मेश्राम के नेतृत्व में RSS मुख्यालय, नागपुर का बड़े पैमाने पर घेराव किया जा सकता है।

इसमें देशभर से SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी संभावित है, जो बहुजन राजनीतिक चेतना के नए चरण का संकेत देती है।

⚖️ राजनीति के जानकार क्या कहते हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव सत्ता संतुलन में बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकता है, जहां बहुजन ताकतें RSS के वैचारिक प्रभुत्व को सीधी चुनौती दे रही हैं।

RSS प्रमुख मोहन भागवत की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिससे टकराव या संवाद – दोनों की संभावनाएं बनी हुई हैं।

📰 लोकतंत्र बनाम वैचारिक नियंत्रण

यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर इकट्ठा होने की आज़ादी, लोकतंत्र और शासन पर वैचारिक संगठनों के प्रभाव पर राष्ट्रीय बहस को तेज कर रहा है।

बा ने कहा है!

"सोते-सोते दिमाग़ हो सकता है और तेज़ ! एक नए अध्ययन के अनुसार, नींद के दौरान तेज़ मस्तिष्क की सुगंध (Aroma) के संपर्क में आने से कार्यक्षमता में 226% तक सुधार हो सकता है। साथ ही याददाश्त मजबूत होती है सीखने की क्षमता बेहतर हो सकती है यानी अच्छी नींद + सही सुगंध = स्मार्ट ब्रेन का सीक्रेट होंगा"

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