आज भी भारत में 'विदेशी ब्राह्मण' बहुजन समाज को तोड़ने का कर रहे हैं काम: निशा मेश्राम
अमरावती: अमरावती में आयोजित एक दिवसीय धम्म परिषद में बोलते हुए प्रखर वक्ता निशा मेश्राम ने जातिवादी व्यवस्था पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि आज भी भारत में 'विदेशी ब्राह्मण' हमारे बहुजन समाज में तोड़-फोड़ करने और फूट डालने का काम कर रहे हैं। भदंत आनंद कौशल्यायन की जयंती के अवसर पर उमड़े जनसैलाब को संबोधित करते हुए उन्होंने समाज को जागरूक रहने की अपील की।
निशा मेश्राम ने कहा कि देश में तीन प्रकार के नकारात्मक विचार जानबूझकर फैलाए जा रहे हैं:
- बहुजन युवाओं को सरकारी नौकरी न मिलने का डर फैलाना।
- युवतियों के मन में असुरक्षित भविष्य का भ्रम पैदा करना।
- वामन मेश्राम के परिवर्तनकारी कार्यों के प्रति नकारात्मकता फैलाना।
उन्होंने वर्तमान सरकार को विदेशी ब्राह्मणों के वर्चस्व वाली आरएसएस-भाजपा सरकार करार देते हुए कहा कि 2014 के बाद से जानबूझकर सरकारी संस्थाओं का निजीकरण किया गया है। इससे बेरोजगारी, आत्महत्या, मॉब लिंचिंग और महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
निशा मेश्राम ने घोषणा की कि 22 फरवरी 2026 को माननीय वामन मेश्राम के नेतृत्व में बामसेफ (BAMCEF) और भारत मुक्ति मोर्चा द्वारा नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पर विशाल 'जन आक्रोश मोर्चा' निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मोर्चे की तैयारी देख विदेशी ब्राह्मण और सरकार घबराए हुए हैं।
रात के बचे हुए चावल में पानी डालकर खाना (पंता भात) गरीबों का खाना था। अमेरिका में इसे 'Ice Rice' या 'Probiotic Rice' बोलकर सुपरफूड माना जा रहा है। इसमें B12 विटामिन होता है. जो थकान और पेट की गर्मी मिटाता है।
बासी चावल सोना है।"
