हिंदू धर्म नहीं बल्कि ब्राह्मण धर्म है – वामन मेश्राम | भीमा कोरेगांव विजय दिवस

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हिंदू धर्म नहीं बल्कि ब्राह्मण धर्म है – वामन मेश्राम | भीमा कोरेगांव विजय दिवस
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वामन मेश्राम ने कहा कि शौर्य हारने वाले भी दिखाते हैं, लेकिन भीमा कोरेगांव की लड़ाई विजय का प्रतीक है.

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पुणे / NAYAK1NEWS : भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों पर तीखा हमला बोला है। भीमा कोरेगांव में आयोजित एक अभिवादन सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिसे आज ‘हिंदू धर्म’ कहकर प्रचारित किया जा रहा है, वह वास्तव में ‘ब्राह्मण धर्म’ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बहुजन समाज अनजाने में इस प्रचार का शिकार बनता जा रहा है और इसी कारण सामाजिक अन्याय को धार्मिक परंपरा के रूप में स्वीकार कर रहा है।

भीमा कोरेगांव: शौर्य दिवस नहीं, यह ‘विजय दिवस’ है

वामन मेश्राम ने इतिहास की व्याख्या करते हुए कहा कि भीमा कोरेगांव को केवल ‘शौर्य दिवस’ कहना ऐतिहासिक दृष्टि से गलत है।

उन्होंने कहा कि शौर्य हारने वाले भी दिखाते हैं, लेकिन भीमा कोरेगांव की लड़ाई विजय का प्रतीक है।
“अगर यह विजय का इतिहास न होता, तो डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर यहां मानवंदना देने कभी नहीं आते। हमारे पूर्वजों ने यह लड़ाई उन पेशवाओं के विरुद्ध जीती थी, जिन्होंने बहुजनों के गले में हांडी और कमर पर झाड़ू बांधने जैसी अमानवीय प्रथाएं थोपी थीं।”
— वामन मेश्राम

जाति और छुआछूत के बीच का अंतर

सभा को संबोधित करते हुए मेश्राम ने ‘शूद्र’ और ‘अस्पृश्य’ के बीच के अंतर को विस्तार से समझाया।

  • शूद्र (Touchable): महाराष्ट्र के मराठा, कुणबी और OBC समुदाय ब्राह्मण धर्म के अनुसार शूद्र हैं, लेकिन वे अस्पृश्य नहीं हैं और चौथे वर्ण में आते हैं।
  • अस्पृश्य (Untouchable): इन्हें चारों वर्णों से बाहर रखा गया और सामाजिक रूप से पूर्ण बहिष्कार किया गया।

उन्होंने कहा कि भेदभाव केवल अनुसूचित जातियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछड़ों और यहां तक कि राजाओं के साथ भी हुआ।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज ने छत्रपति शिवाजी महाराज को राजा मानने से इनकार किया और उनके राज्याभिषेक तक में बाधाएं डालीं।

‘हिंदू’ शब्द पर दयानंद सरस्वती का हवाला

वामन मेश्राम ने आर्य समाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती का हवाला देते हुए कहा कि ‘हिंदू’ शब्द मूल रूप से मुगलों और मुसलमानों द्वारा दिया गया शब्द है, जिसे उन्होंने अपमानजनक संदर्भ में प्रयोग किया।

“जब बहुजन समाज यह समझ जाएगा कि हिंदू शब्द उनके स्वाभिमान के खिलाफ है, तब RSS के लिए इसका उपयोग करना कठिन हो जाएगा और साढ़े तीन प्रतिशत ब्राह्मण समाज अलग-थलग पड़ जाएगा।”
— वामन मेश्राम

जानकारी बनाम ज्ञान: बदलाव की असली लड़ाई

मेश्राम ने शिक्षित वर्ग पर कटाक्ष करते हुए कहा कि समाज के पास जानकारी तो है, लेकिन ज्ञान का अभाव है।

उन्होंने कहा, “जिस जानकारी का सही उपयोग करके सफलता प्राप्त की जाए, वही ज्ञान है। हमारे लोग जानकारी को शस्त्र की तरह इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक विचारों में परिवर्तन नहीं होगा, तब तक सामाजिक बदलाव संभव नहीं है।

“ब्राह्मणों ने जानबूझकर ‘ब्राह्मण धर्म’ को ‘हिंदू धर्म’ के नाम से प्रचारित किया ताकि वे बहुजनों पर नियंत्रण बनाए रख सकें। हमें ब्राह्मण धर्म और बहुजन समाज को अलग करने की कला सीखनी होगी।”
— वामन मेश्राम
बा ने कहा है!,

"कान में दर्द होने पर कौन सा तेल डालना चाहिए?

कान के दर्द से राहत के लिए जैतून के तेल, नारियल तेल और सरसों के तेल को गर्म करके इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन ध्यान रहे, इनका इस्तेमाल करने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह जरूर लें।"

✊जय मूलनिवासी!

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