शौर्य, बलिदान और आत्मसम्मान की ऐतिहासिक भूमि – भीमा कोरेगांव.— बामसेफ महासचिव गोरखनाथ वेताळ

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भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस: हमारे पूर्वज थे साहसी शूरवीर | NAYAK1NEWS

भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस: हमारे पूर्वज थे साहसी, शूरवीर योद्धा

— बामसेफ महासचिव गोरखनाथ वेताळ
📍 पुणे | NAYAK1NEWS


हमारे बहुजन समाज के महापुरुष, हमारे पूर्वज साहसी थे, धैर्यवान थे, शूरवीर योद्धा थे — यह बात भीमा कोरेगांव की लड़ाई का इतिहास हमें बताता है। यह वक्तव्य 1 जनवरी को भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस के अवसर पर बामसेफ सामाजिक संगठन के महासचिव गोरखनाथ वेताळ ने अपने भाषण में दिया।

उन्होंने कहा कि आज हम भीमा कोरेगांव शौर्य दिवस के अवसर पर एकत्र हुए हैं। आज हम 208वें विजय दिवस की अभिवादन सभा के लिए आए हैं। यह दिन केवल विजय दिवस नहीं बल्कि शौर्य, बलिदान और संघर्ष का ऐतिहासिक दिन है।

🔴 ब्रेकिंग न्यूज़

गोरखनाथ वेताळ ने कहा कि वर्षों तक ब्राह्मणी व्यवस्था ने भीमा कोरेगांव के इस ऐतिहासिक दिन को छुपाकर रखा, क्योंकि यह दिन हमारे पूर्वजों के शौर्य और विजय का प्रतीक है तथा पेशवाशाही की हार का दिन है।

उन्होंने बताया कि भीमा नदी के तट पर पेशवाओं के विरुद्ध महार बटालियन के 500 सैनिकों ने साहसपूर्वक युद्ध किया। इस लड़ाई में पुणे के पेशवा ब्राह्मणों को अपमानजनक पराजय का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि इसी कारण आज भी कुछ शक्तियां भीमा कोरेगांव के वास्तविक इतिहास को सामने आने से रोकना चाहती हैं, क्योंकि यह इतिहास बहुजन समाज के पराक्रम और आत्मसम्मान का प्रमाण है।

👉 जारी रहेगा… (भाग – 2)


✍️ रिपोर्ट : NAYAK1NEWS

शौर्य, बलिदान और आत्मसम्मान की भूमि भीमा कोरेगांव | NAYAK1NEWS

शौर्य, बलिदान और आत्मसम्मान की ऐतिहासिक भूमि – भीमा कोरेगांव

📍 पुणे | NAYAK1NEWS


गोरखनाथ वेताळ ने कहा कि भीमा कोरेगांव की भूमि शहीदों की भूमि है। यह महार बटालियन के उन वीर सैनिकों की भूमि है जिन्होंने अन्याय, अत्याचार और पेशवेशाही के विरुद्ध संघर्ष किया।

1 जनवरी 1818 को भीमा नदी के तट पर ऐतिहासिक युद्ध हुआ। इस युद्ध में महार बटालियन के 500 सैनिकों ने पेशवा बाजीराव की विशाल सेना का सामना किया। यह लड़ाई लगभग 24 घंटे तक चली और अंततः पेशवाशाही को करारी हार का सामना करना पड़ा।

🔥 ऐतिहासिक विजय

इस लड़ाई में शहीद हुए वीर सैनिक अमर हो गए। उनकी स्मृति में भीमा कोरेगांव में विजय स्तंभ का निर्माण किया गया, जिस पर महार बटालियन के शहीद सैनिकों के नाम अंकित हैं।

हर वर्ष देशभर से लाखों बहुजन समाज के लोग इस शहीद स्तंभ को नमन करने आते हैं और अपने पूर्वजों के शौर्य से प्रेरणा लेते हैं।

✊ बहुजन समाज के लिए प्रेरणा

गोरखनाथ वेताळ ने कहा कि पेशवेशाही और ब्राह्मणशाही के दौर में बहुजन समाज, महिलाओं, किसानों और आम जनता पर अत्याचार किए गए। भीमा कोरेगांव की लड़ाई उन अन्यायों के विरुद्ध ऐतिहासिक जवाब थी।

उन्होंने कहा कि यह दिन हमें सिखाता है कि हमारे पूर्वज कायर नहीं थे, बल्कि साहसी, शूरवीर और संघर्षशील योद्धा थे। इसलिए 1 जनवरी को बहुजन समाज शौर्य दिवस और विजय दिवस के रूप में मनाता है।


बा ने कहा है!,

"रात को सोने से पहले:

खसखस पीसकर दूध में उबालें, थोड़ा जायफल डालें। गहरी नींद और मस्तिष्क शांति का अनुभव होगा। ।"

✊जय मूलनिवासी!

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